बाला किले के रहस्यमय खजाने का रहस्य और इतिहास

Bala Quila
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नमस्कार! आपका हमारे Knowledge With Ruchi Blog में स्वागत है भारत अपने इतिहास और भूगोल के लिए दुनिया में प्रसिद्ध है। भारत में बहुत से किले और महल बने हुए हैं, जो अपने इतिहास के लिए प्रसिद्ध हैं, साथ ही कई प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरे भी मौजूद है, जिन्हें यूनेस्को और नेशनल वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है।

आज हम ऐसे ही एक किले के बारे में जानेंगे जिसका नाम है “बाला किला” “अलवर किला“।

यदि आप ऐतिहासिक धरोहरों को देखने या उनके बारे में जानने के शौकीन है तो आर्टिकल को शुरू से अंत तक पूरा पढ़ें।

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बाला किले का इतिहास (Bala Quila History in Hindi):-

Bala Quila
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बाला किला, जिसे अलवर किले के नाम से भी जाना जाता है, इस किले का इतिहास 15वीं शताब्दी का है। इसे खानजादा राजपूत शासक हसन खान मेवाती ने बाहरी आक्रमणों के खिलाफ रक्षात्मक गढ़ के रूप में बनवाया था। इस किले का निर्माण ऊँची अरावली पहाड़ी के ऊपर किया गया है, जिससे यह एक दुर्जेय किला बन गया।

मुगल काल के दौरान किले में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जब यह सम्राट बाबर के शासन में आया। मुगलों ने बाला किले के रणनीतिक महत्व को पहचाना और इसकी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई सुधार किए। आज हम जो जटिल वास्तुकला और डिजाइन तत्व देखते हैं, वे किले पर मुगल प्रभाव का परिणाम हैं।

18वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य के विस्तार के दौरान बाला किला एक केंद्र बिंदु बन गया। हालाँकि, यह अंततः कछवाहा राजपूतों के हाथों में पड़ गया, जिन्होंने अलवर रियासत की स्थापना की। किले ने अलवर शासकों के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इस अवधि के दौरान इसकी भव्यता और भी बढ़ गई।

बाला किले की वास्तुकला (Architecture of Bala Fort ):-

Bala Quila
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बाला किला राजपूत सैन्य वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है। किले की विशेषता विशाल दीवारें, बुर्ज और द्वार हैं, जिन्हें जटिल रूप से डिजाइन किया गया है। वास्तुकला की विशेषताएं राजपूत और मुगल शैलियों के मिश्रण को दर्शाती हैं।

इस किले की दीवारें पूरी पहाड़ी पर फैली हुई है, यह किला इतना विशाल है कि उत्तर से दक्षिण तक 5 किमी और पूर्व से पश्चिम तक 1.6 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस किले की खास बात यह है कि इस किले पर इतिहास में कभी भी युद्ध नहीं हुआ, इस कारण इस किले को “कुंवारा किला” भी कहा जाता है।

बाला किले की सीमा के भीतर, कई संरचनाएँ अपने ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के लिए विशिष्ट हैं। किले के भीतर एक बड़ा जलाशय, सूरज कुंड, घेराबंदी के समय एक महत्वपूर्ण जल स्रोत के रूप में कार्य करता था। इस किले में 6 द्वार हैं जिन्हें जय पोल, सूरज पोल, लक्ष्मण पोल, चांद पोल, कृष्ण पोल और अंधेरी गेट के नाम से जाना जाता हैं।, प्रत्येक को जटिल नक्काशी और डिजाइन से सजाया गया हैं।

इतना ही नहीं, बल्कि किले को दुश्मनों से बचने के लिए किले की दीवारों में 446 छेद भी बनाए गए, यह छेद शत्रुओं के आक्रमण के लिए बनाए गए थे, इन छेदों से 10 फुट लंबी बंदूक से भी गोली चलाई जा सकती थी इसके अलावा शत्रुओं पर नजर रखने के लिए किले में 15 बड़े और 51 छोटे बुर्ज बनवाए गए हैं। 

बाला किले के आसपास पर्यटक स्थल (Tourist Place Around of Bala Fort):-

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अगर आप बाला किला घुमने का प्लान बना रहे है तो आप को बता दे की राजस्थान के अलवर जिले में बाला किले के अलावा भी कई प्रसिद किले, पैलेस, मन्दिर, समुद्र तट तथा अन्य लोकप्रिय पर्यटक स्थल है, जो बाला किले के नजदीक ही स्थित है जो बेहत ही प्रसिद भी माने जाते है जहाँ आप को अलवर जिले की यात्रा के दोरान अवश्य जाना चाहिए।

  • सरिस्का नेशनल पार्क
  • अजबगढ़ का किला
  • प्रतापगढ़ किला
  • भर्तहरि मंदिर
  • काली घाटी
  • सिटी पैलेस
  • विजय मंदिर पैलेस
  • बाला किला
  • जयसमंद झील
  • सिलीसेढ़ झील
  • सरिस्का पांडुपोल हनुमान मंदिर
  • कंकावटी किला
  • नीलकंठ महादेव
  • भानगढ़ का किला
  • हनुमान मंदिर
  • केसरोली किला
  • सरिस्का पैलेस
  • सिलीसेढ़ लेक पैलेस
  • सरकारी म्यूजियम
  • विनय विलास महल

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बाला किला घुमने का सही समय, खुलने का समय और प्रवेश शुल्क :-

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घूमने का सही समय :

अगर आप बाला किला घूमने जाने का विचार बना रहे हैं तो हम आपको बता दें कि वैसे तो साल में आप कभी भी जा सकते हैं लेकिन अप्रैल से जून तक के महीने में ना जाए क्योंकि इन महीनों में तापमान अधिक डिग्री तक पहुँच जाता है । इसलिए आप अक्टूबर से लेकर फरवरी तक के सर्दियों के महीनों में वहां घूमने जा सकते हैं। इस समय मौसम ठंडा रहता है और बाला किला बेहद खुबसूरत लगता है।

खुलने का समय :-

बाला किला सुबह 9 बजे से लेकर शाम को 6 बजे तक खुला रहता हैं।

प्रवेश शुल्क :-

एक समय था जब किले में प्रवेश करने के लिए इलाके के एसपी से अनुमति लेनी पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब पर्यटक बिना अनुमति लिए किले में प्रवेश कर सकते हैं और इसके लिए कोई शुल्क भी नहीं देना पड़ता, आप बिना प्रवेश शुल्क दिए किले में आराम से घूम सकते हैं।

बाला किले तक केसे पहुंचे (How to Reach Bala Fort) :-

ट्रेन से बाला किले तक केसे पहुंचे :-

अगर आप ट्रेन से जाने की सोच रहे हैं तो आप को बता दे की किले के सबसे नजदीक अलवर जंक्शन है रेलवे स्टेशन से आप बस या टेक्सी ले सकते है और किले तक पहुच सकते है।

फ्लाइट से बाला किले तक केसे पहुंचे :-

अगर आप हवाई जहाज से जाना चाहते हैं, तो अलवर जिले का खुद का कोई हवाई अड्डा नही है जयपुर में स्थित सांगानेर हवाई अड्डा किले के सबसे नजदीक है हवाई अड्डे से आप बस या टेक्सी की मदद से किले तक पहुंच सकते है।

सड़क मार्ग से बाला किले तक केसे पहुंचे :-

अगर आप सड़क मार्ग के रास्ते से जाना चाहते हैं तो आप खुद के साधन से भी जा सकते हैं यह बाला किला सड़क मार्ग के द्वारा सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है और सभी शहरों में चलने वाली सार्वजनिक बसे भी आपको अलवर जिले या बाला किले तक पहुंचा सकती हैं।

बाला किले तक पहुंचने का मेप :-

सवाल जवाब (Question Answer) :-

बाला किला कहां स्थित है?

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है।

बाला किले की स्थापना कब हुई?

किले का निर्माण 15वीं शताब्दी में हुआ था।

बाला किले का निर्माण किसने करवाया?

राजपूत शासक हसन खान द्वारा किया गया था।

बाला किला प्रेरकों के लिए कितने बजे खुलता और बंद होता है?

बाला किला सुबह 9 बजे से लेकर शाम को 6 बजे तक खुला रहता हैं।

बाला किला क्यों फेमस है?

यह किला अपनी विशिष्ट वास्तुकला, और ऊँची अरावली पहाड़ी के ऊपर बने होने के कारण काफी फेमस है। इस किले की खास बात यह है कि इस किले पर इतिहास में कभी भी युद्ध नहीं हुआ, इस कारण इस किले को “कुंवारा किला” भी कहा जाता है।

सबसे महत्वपूर्ण बाते (Most important topic) :-

दोस्तों की ऐतिहासिक इमारतों महलों और पर्यटक स्थलों पर यात्रा अवधि टिकट के पैसे जैसे छोटी चीजें बदलती रहती है।

यदि अगर आप को इनके बारे में पता है तो आप कमेंट में जरूर लिखें हम आपके द्वारा दी गई जानकारी जल्द ही अपडेट कर देंगे और यदि इस पोस्ट में हमसे कोई गलती हो गई है तो वह जरूर बताएं।

धन्यवाद

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